Header Ads Widget

Responsive Advertisement

bryophyta information in hindi 2020

    ब्रयोफाइटा -
=>उपनाम -मॉस -

=>बॉयोलॉजी -वनस्पति विज्ञानं की वह शाखा जिसमे ब्रयोफाइट का अध्ययन किया जाता है 
=>father of bryology-   F-केवर्स 
=>father of indian bryology -s.r.कशयप 

नॉट :-इन्होने पश्चिम  हिमालय क्षेत्र में उपस्थित ब्रयोफाइट का 
अध्ययन किया 

ब्रयोफाइट  के महत्वपूर्ण लक्षण-
=>ब्रयोफैंटा ऐसे पादप है जो सर्वप्रथम जल से बाहर निकल कर स्थल में उगने लगे | 
=>इस कारण इनको पादप जगत का उभयचर कहा जाता है | 
=>ब्रयोफाइट की अधिकांश जातियां स्थलीय परन्तु कुछ जतियाँ आवास में पायी जाती है जैसे -रिकसिया फ़्लूटेंस ,रिकसियो कॉर्प्स स्पेग्न्म| 
=>ब्रयोफाइट अत्यधिक नामिये वातावरण में पाए जाते है तथा यह बरसात के समय उगते है 
=>ब्रयोफाइट का पादप शरीर थैलस होता है परन्तु उच्च वर्गीय ब्रयोफाइट में पर्णिल थैलस का निर्माण होता है | 
=>यह थैलस अगुणित अवस्था में पाया जाता है जो युग्मोदभिद पीढ़ी को प्रदर्शित करता है यह इसकी स्वतंत्र जीवी पीढ़ी है | इनमे जड़ के स्थान पर मूलाभास पाए जाते है जो एक कोशिकीय /बहुकोशिकीय /शाखित /अशाखित प्रकार के होते है 

ब्रयोफाइटा में जनन -
=>ब्रयोफाइटा में कायिक जनन मुख्य रूप से गेमा /गेमी तथा अपस्थानिक कलिकाओं व कंदो के द्वारा संपन्न होता है 
नॉट :-
         गेमाकप मर्केन्शिया में बनने वाली प्याले नुमा संरचना है जिनमे गेमा का परिवर्धन होता है ब्रयोफाइटा में सामान्यतः अलैंगिक जनन नहीं पाया जाता है 

लैंगिक जनन =>ब्रयोफाइटा के थैलस में बहुकोशिकीय बंध्य जैकेट आवरण युक्त लैंगिक जनन अंग बनते है जो पृष्ट सतह पर बनते है 
नर जनन अंग पुंधानी कहलाती है जो टेनिस के रैकेट के समान होती है 
पुंधानी में गतिशील व छोटे आकर के नर युग्मक का निर्माण होता है मादा जनन अंग स्त्रिधानि  कहलाती है जो फ्लास्क के समान होती है 

स्त्रिधानि का ऊपरी भाग ग्रीवा कहलाता है तथा  निचला फुला हुवा भाग वेंटर कहलाता है जिसमे एक अण्ड कोशिका पायी जाती है 

निषेचन -
=>परिपकव पुंधानी में पुमणु का निर्माण होने के पश्चात इसका स्फुटन होता है जिससे अगुणित पुमणु(नर युग्मक)  जल में मुक्त होते है तथा 
=>रसायन अनुचलन गति करते हुए स्त्रिधानि में उपस्थित अण्ड कोशिका साथ संलयित होते है जिसे निषेचन कहते है | 
=>निषेचन के फलस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है और बीजाणुदबिद  पीढ़ी भी पप्रारम्भ होती है 

बीजाणुद भद्द का निर्माण -
=>युग्मनज में अनेक समसूत्री विभाजन होने के फलस्वरूप बहुकोशिकीय द्विगुणित संरचना बीजाणुदभिद का निर्माण होता है 
=> बीजाणुदभद्द foot, seta, capsul, में विभक्त होते है 
=>कैप्सूल भाग में उपस्थित बीजाणु जन कोशिकाओं में अर्धसूत्री वभाजन के फलस्वरूप अगुणित बीजाणु का निर्माण होता है जो अंकुरित होकर नया थैलस(अगुणित ) बनती है 

ब्रयोफाइटा का वर्गीकरण -
1 . हिपेटो कप्सीडा -उपनाम -लीवरवर्ट 
ex . रिकसिया , मर्केन्शिया 
=>इनका थैलस चपटा व पृष्ट धारी होता है 
=>थैलस  की निचली सतह पर एक कोशिकीय मूलाभास पाए जाते है जो चिकनी भीति युक्त या गुल्किये प्रकार के होते है 
=>बीजाणुदबिद  में foot,seta,capsulउपस्थित परन्तु रिक्सिया के बीजाणुदबिद  में केवल capsul ही उपस्थित होते है 

2 . एंथोसिरोटोप्सीड्डा -हॉर्न वर्ट 
ex . एंथोसिरोस 
=>इनका थैलस भी चपटा होता है परन्तु इनमे आन्तरिक विभेदन नहीं पाया जाता है 
=>मूलाभास एक कोशिकीय व चिकनी भीति युक्त होते है | 
=>इसमें बीजाणुदबिद  रेखाकार होता है 
=>foot ,seta ,capsul में विभक्त होता है 

3 . बॉयोप्सिडा -मॉस 
ex . स्पेग्न्म ,फ्युनेरिया 
=>इनमे पर्णिल थैलस उपस्थित होता है 
=>तथा सूक्ष्म शाखाओं का निर्माण होता है 
=>मूलाभास बहुकोशिकीय व तिरछे पट्टों युक्त होता है | 
=>बीजाणुद बिद foot, seta, capsul में विभक्त होता है जिनके  केप्सूल में परिमुख दन्त उपस्थित होते है जो केप्सूल के स्फुटन में सहायता करते है 


ब्रयोफाइट का आर्थिक महत्व -
=>ब्रयोफाइट में सार्वाधिक आर्थिक महत्व स्पेग्न्म क होता है जो निम्न प्रकार है 
=>स्पेगेंम जलाशय के पेंदे में एकत्र होकर कालांतर में पीट कोयले में रूपांतरित हो जाते है 
=>स्पेगेंम में एंटीसेप्टिक के गुण पाए जाने के कारण इसका उपयोग मरहम पट्टी निर्माण में किया जाता है | 
=>स्पेग्न्म से स्पेगनोल प्राप्त होता है जिसका उपयोग चरम रोग के उपचार में किया जाता है | 
=>कुछ ब्रयोफाईट प्रकृति में सूचक का कार्य करते है जेसे -
a . ब्राइम आर्जेन्टम उन स्थानों पर ही पाए जाते है जहां मृदा क्षारीय होती है (जहाँ चांदी उपस्थित होती है )

b . मर्केन्शिया पोलीमोर्फा उन स्थानों पर उगते है जहाँ बाढ़ या आग लगी हो | 

c . फ्युनेरिया उन स्थानों पर पाए जाते है जहाँ पर ताँबे  की उपस्थिति होती है  















एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ